मकर संक्रांति पर्व इस बार शोभन योग में, दान-पुण्य का अधिक होगा महत्व


मकर संक्रांति पर इस बार शोभन योग में सूर्य का राशि परिवर्तन हो रहा है। इससे जप तप और श्राद्ध तर्पण का महापर्व काफी खास होगा। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और शोभन योग में मकर संक्रांति होने से महत्व काफी बढ़ गया है। इसमें किया गया दान पुण्य और अनुष्ठान तत्काल फल देने वाला होता है। माघ कृष्ण पंचमी बुधवार 15 जनवरी को आ रही है और इसी तिथि पर विशेष योग बन रहा है।











सनातन धर्म में मकर संक्रांति को मोक्ष की सीढ़ी बताया गया है। इसी तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाते हैं तथा खरमास समाप्त हो जाता है। प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति से शुरू होता है। इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है। गंगा स्नान को मोक्ष का रास्ता माना जाता है और इसी कारण से लोग इस तिथि पर गंगा स्नान के साथ दान करते हैं।

 

15 जनवरी को सुबह 07:52 बजे से पूरे दिन पुण्यकाल रहेगा।

 

15 जनवरी दिन बुधवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और शोभन योग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। भगवान सूर्य शनिदेव के पिता हैं। सूर्य और शनि दोनों ही ग्रह पराक्रमी हैं। ऐसे में जब सूर्य देव मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है। इस कारण मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं का दान शनिदेव की विशेष कृपा को घर परिवार में लाता है।

 

मकर संक्रांति के अतिरिक्त रविवार के दिन गेहूं और गुड़ गाय को खिलाने या किसी ब्राहमण को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य की कुंडली में स्थिति मजबूत होती है। भगवान सूर्य को खुश करने के लिए रात के समय कदंब और मुकुल के फूल अर्पित करना श्रेयस्कर माना जाता है।

 

(सोर्स - वेबदुनिया )