लखनऊ शहर, मेरी जुबानी......






रचनाकार - सुविज्ञ सिंह वत्स।


 

ये जो शहरे-लखनऊ है जनाब,




मशहूर यहां के हैं टुण्डे कबाब।

 

इतिहास को समेटे यह शहर खड़ा है,

वक्त की रफ्तार में अब आगे बढ़ा है।

 

पुराने शहर अमीनाबाद का चिलमन है एक ओर,

गोमतीनगर आधुनिकता का मानो सतरंगी डोर।

 

रूमी गेट पर एक तस्वीर जरूर खिचवाईए,

पास में है इमामबाड़ा एक नज़र फरमाईए।

 

आर्ट गैलरी व क्लाॅक टावर के क्या ही कहने,

लखनवी चिकनकारी का कुर्ता जरूर पहनें। 

 

थोड़ा बगल में ही है हमारा अपना चौक,

मीठे पान एवं लस्सी का पूरा करें शौक।

 

जहां टीले वाली मस्जिद से होती अज़ान,

वहीं गोमती की आरती का निकट है स्थान।

 

मेडिकल काॅलेज मे है सारे इलाज का प्रबंध,

शर्मा जी की चाय के साथ लें समोसा व बन्द ।

 

शहर की दिल की धड़कन है हजरतगंज,

आजकल इसके नीचे से निकल रही सुरंग।

 

अंग्रेजों से युद्ध की गवाह है रेजीडेन्सी,

मेट्रो के चल जाने से नगर हुआ है फैन्सी।

 

हनुमान सेतु मंदिर पर मंगलवार का जाम,

झुकते सबके सिर लेकर श्री राम का नाम। 

 

कुछ आगे बढ़ने पर आता है अलीगंज,

कहीं सड़कें चौड़ी कहीं पर जरा हैं तंग।

 

जानकीपुरम स्थित इंजीनियरिंग काॅलेज,

आईआईएम मे बढ़ती प्रबंधन की नॉलेज।

 

रिंग रोड यहां की है पैंसठ किमी लम्बी,

शहर की इमारतें इस पर हैं गंगनचुम्बी ।

 

बागों  की नगरी का बादशाह चारबाग,

चौबीस घंटा यहां दिखती है दौड़ भाग ।

 

अमौसी हवाई अड्डे से अब बहुत हैं फ्लाइट,

लें इसका भी आनंद जब शेड्यूल हो टाईट।

 

आलमबाग बस अड्डा भी अब गया है चमक,

अंम्बेडकर,जनेश्वर पार्क की अपनी है दमक।

 

राॅयल कैफे का चाट व इदरिस की बिरयानी,

प्रकाश की कुल्फी से अंत करता हूं कहानी।