लखनऊ: इंटरनेट बैन से करोड़ों का नुकसान


लखनऊ


सरकार से लेकर प्रशासनिक अफसर तक राजधानी में पूरी तरह अमन-चैन का दावा कर रहे हैं। इसके बावजूद शहर में पिछले पांच दिनों से मोबाइल इंटरनेट और मेसेज पर पाबंदी बरकरार है। यहां तक कि जिन जिलों में सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी, वहां भी सोमवार से इंटरनेट सेवाएं बहाल हो गईं। इसके उलट राजधानी के लोग मोबाइल इंटरनेट और मेसेज सुविधा के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में मंदी जैसे हालात हैं तो कैब ड्राइवर भी इंटरनेट के न होने से बेरोजगार बैठे हैं।
बेरोजगार बैठे 8500 कैब ड्राइवर


कैब चलाने वाले रामजी यादव, राम देव और दिनेश शाहू पिछले पांच दिन से बेरोजगार बैठे हैं। ये तीनों रोजाना कैब चलाने से होने वाली आमदनी से ही घर चलाते हैं, लेकिन पांच दिन से इनकी कोई आमदनी नहीं हो सकी। इनकी तरह शहर में करीब 8500 कैब ड्राइवर रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। यही नहीं, कैब न चलने से पिछले पांच दिनों में करीब 4.5 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो चुका है।

लखनऊ ओला-उबर असोसिएशन के अध्यक्ष आरके पांडेय ने बताया कि एक दिन में एक ड्राइवर 10 से 12 ट्रिप के जरिए करीब 1200 से 1500 कमाता है। इंटरनेट बंद होने से करीब 8500 ड्राइवर बेकार बैठे हैं। इनके परिवार के लोग भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो ओला-उबर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

इंटरनेट बंद होने से नहीं हो रही कैब बुकिंग


इंटरनेट बंद होने से कैब से रोजाना आने-जाने वाले लोग भी परेशान हैं। शहर में एक दिन में औसतन 80 से 90 हजार लोग कैब का इस्तेमाल करते हैं। इनकी बुकिंग न होने पाने से ऐसे लोगों को ऑटो या बस का सहारा लेना पड़ रहा है। सआदतगंज निवासी राहुल गुप्ता ने बताया कि उनकी बहन रोज कैब से पढ़ने जातीस थी, लेकिन पिछले पांच दिन से अपनी गाड़ी से ड्राइवर के साथ भेजना पड़ रहा है। दूसरे लोग भी घर की गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे खर्च भी बढ़ गया है।

ऑनलाइन खरीदारी ठप, नहीं बन रहे ई-वे बिल


इंटरनेट बैन के कारण पिछले पांच दिनों में शहर में करीब 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। ऑनलाइन खरीदारी के साथ जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल चालान और कैब बुकिंग सहित कई सेक्टरों में काम ठप है। यहां तक कि दुकानों पर भी ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पा रहा। इससे आम व्यापारी भी परेशान हैं। उनका कहना है इंटरनेट बंदी बाजार बंदी में तब्दील होते जा रही है।

इंटरनेट न चलने से सबसे ज्यादा नुकसान ई-कॉमर्स कंपनियों को हुआ है। ऑनलाइन शॉपिंग का डेटा जुटाने वाली कंपनी टेक्नोपैक एडवाइजर के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट अंकुर बिसेन के मुताबिक, ऑनलाइन खरीदारी में 35% भागेदारी मोबाइल सेक्टर का है, जबकि 25% फैशन सेक्टर का। ऐसे में वे व्यापारी भी टेंशन में हैं, जो ई-कॉमर्स कंपनियों के मार्फत व्यापार कर रहे हैं।