शिल्प मेले में उत्पादों की बिक्री के साथ युवाओं को प्रशिक्षण भी


प्रयागराज


देश के सात राज्यों में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाला प्रयागराज का उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र अब युवाओं को कारीगरों के माध्यम देश की कला और संस्कृति से जोड़ेगा। इसकी शुरुआत रविवार से शुरू होने वाले शिल्प मेले से होगी। जिसमें शिल्पी और कलाकार न सिर्फ अपने उत्पादों की बिक्री करेंगे बल्कि अपने स्टॉल पर ग्राहकों के सामने ही उन्हें तैयार भी करेंगे। इस दौरान शहर के अलग-अलग स्कूलों के छात्र छात्राओं को शिल्पी और कारीगर प्रशिक्षण की देंगे। इस तरह शिल्प मेले में न सिर्फ हस्तशिल्प व कला को नए ग्राहक मिलेंगे बल्कि एक नई पीढ़ी भी तैयार होगी, जो उसे बारीकी से समझ सकेगी।


उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उत्तर प्रदेश के साथ ही देश के सात राज्यों में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने का काम करता है। इस केंद्र के जरिए संबंधित राज्यों की लोक कलाओं और शिल्प को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग तरह के आयोजन किए जाते हैं। शिल्प मेला इन आयोजनों में से एक है, जो प्रयागराज स्थित केंद्र के परिसर में 1 दिसंबर से शुरू होता है। जिसमें देशभर के हस्तशिल्पियों और कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री का मौका मिलता है। इसके साथ ही लोक कलाओं का प्रदर्शन भी किया जाता है। हालांकि, इस बार का शिल्प मेला कुछ अलग होगा।

10 दिन चलने वाले मेले में छात्र-छात्राओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण


केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने बताया कि इस बार शिल्प मेले में नई पीढ़ी को शिल्प और कला को करीब से देखने का मौका भी मिलेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से अलग-अलग स्कूलों के छात्र-छात्राओं को 10 दिन तक चलने वाले मेले में शिल्पियों और कारीगरों से उनके उत्पादों को तैयार करने के तौर-तरीके सीखने को मिलेंगे।

देश की सांस्कृतिक एकता को बनाए रखने में आंचलिक सांस्कृतिक विरासत के योगदान को प्रदर्शित करने के लिए इस बार मेले में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के कलाकारों और वहां की लोक कला के साथ ही उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा के कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति के जरिए विरासत को प्रदर्शित करेंगे। शिल्प मेले में 7 राज्यों के 24 प्रकार के व्यंजनों की मौजूदगी भी होगी। इसमें 19 राज्यों के 72 प्रकार के शिल्प उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे। मेले में पहली बार दिव्यांग बच्चों के लिए एक स्टॉल आरक्षित किया गया है। 10 दिसंबर तक चलने वाले मेले में हर दिन अलग-अलग राज्यों और विधा के कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।