जेवर में बनने जा रहा है देश का सबसे बड़ा इंटरनैशनल एयरपोर्ट, 29,560 करोड़ किए जाएंगे खर्च


ग्रेटर नोएडा


जेवर के पास बनने जा रहे नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट का अनुबंध देने के लिए स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनैशनल को शुक्रवार को चुना गया। इसके लिए जारी अंतरराष्ट्रीय निविदा में इस कंपनी ने दिल्ली इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) और अडाणी एंटरप्राइजेज और एंकरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड जैसी कंपनी को पीछे छोड़ दिया। स्विट्जरलैंड की कंपनी ने राजस्व में हिस्सेदारी के मामले में प्रति यात्री सबसे ऊंची बोली लगाई है। तैयार होने के बाद यह देश का सबसे बड़ा हवाईअड्डा होगा।


परियोजना के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि पूरी तरह बनकर तैयार होने के बाद नायल पर 6 से 8 हवाई पट्टियां होंगी जो देश में अब तक किसी हवाई अड्डे की तुलना में सबसे अधिक होंगी। पहले चरण में एयरपोर्ट का विकास 1,334 हेक्टेअर क्षेत्र में किया जाएगा। इस पर 4,588 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसके 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है।

70 मिलियन पैसेंजर्स और 2.6 मिलियन टन कार्गो क्षमता


इस एयरपोर्ट से दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को भी बड़ा फायदा होगा। दरअसल यह एयरपोर्ट पैसेंजर के साथ-साथ कार्गो और एमआरओ के लिए भी बनेगा। इसके चलते लाखों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। एयरपोर्ट का निर्माण 4 चरणों में होगा। पहले फेज में जहां 2023 से 2027 तक 12 मिलियन पैसेंजर उड़ान भरेंगे। वहीं, चौथे फेज के निर्माण के बाद वर्ष 2050 तक 70 मिलियन पैसेंजर यहां से उड़ान भरने लगेंगे।

इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा। इस एयरपोर्ट से दिल्ली-एनसीआर के तमाम उद्योगपति कार्गो के जरिए 2.6 मिलियन टन पक्का और कच्चा माल देश-विदेश में आयात और निर्यात कर सकेंगे। इसके साथ ही यहां एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) भी होगा, जहां हवाई जहाजों की सर्विस और रिपेयरिंग की जाएगी।

5 हजार हेक्टेअर जमीन पर विकसित होगा


5 हजार हेक्टेअर जमीन पर बनने वाला जेवर एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा इंटरनैशनल एयरपोर्ट होगा। इसे अगले 50 साल तक पैसेंजरों की संख्या और कार्गो की जरूरत का ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर में तेजी से बढ़ते उद्योग अपना कच्चा व पक्का माल देश-विदेश में हवाई जहाज के जरिए आसानी से भेज सकेंगे। उद्योगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को 2.6 मिलियन टन कार्गो क्षमता वाला बनाया जाएगा।

40 जिलों को लाभ


इंटरनैशनल एयरपोर्ट बनने से दिल्ली-एनसीआर के अलावा यूपी के करीब 40 जिलों के लोगों को इसका फायदा होगा। एयरपोर्ट बनने के बाद रोड, रेल, मेट्रो व हाईस्पीड ट्रेन से दिल्ली-एनसीआर और यूपी के आसपास के जिलों को जोड़ा जाएगा। इससे लोग आसानी से एयरपोर्ट आकर हवाई जहाज की यात्रा कर सकेंगे। फिलहाल लोगों को दिल्ली के पालम एयरपोर्ट जाना पड़ता है।

देश का पहला एमआरओ


जेवर एयरपोर्ट के बनने के बाद हवाई जहाजों को मेंटेनेंस के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। यहां हवाई जहाजों की सर्विस और रिपेयरिंग आदि की भी सुविधा होगी। इसके लिए यहां देश का पहला एमआरओ बनाया जाएगा। अभी तक हवाई जहाजों को रिपेयरिंग कराने के लिए श्रीलंका के कोलंबो जाना पड़ता है। यहां एमआरओ बनने से हवाई जहाजों को काफी सहूलियत होगी। इससे जहां हजारों लीटर फ्यूल और समय की बचत होगी।

लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार


इंटरनैशनल एयरपोर्ट बनने से एक लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। इसके अलावा यमुना अथॉरिटी एरिया में लगने वाले उद्योगों में भी 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है। एयरपोर्ट की निर्माण प्रक्रिया शुरू होने से यमुना सिटी में इंडस्ट्री लगाने के लिए देशी-विदेशी कंपनियों ने इंडस्ट्रियल प्लॉट के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया है। अथॉरटी लगातार प्लॉटों का आवंटन कर रही है। एयरपोर्ट बनने से यहां होटल, मोटल इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलेगा। यहां वन स्टार से लेकर सेवन स्टार तक के होटल बनेंगे।

निर्माण में 29,560 करोड़ रुपये होंगे खर्च


नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट के निर्माण पर 29,560 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका पहला चरण 2023 से 2027 तक पूरा होगा। जिसमें 12 मिलियन पैसेंजर की क्षमता वाले एयरपोर्ट को बनाने में 4.588 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दूसरा चरण 2031 से 2035 तक पूरा होगा। दूसरे चरण में इसे 30 मिलियन पैसेंजर की क्षमता वाला बनाया जाएगा। जिसके लिए 5.983 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, तीसरा चरण 2036 से 2037 तक पूरा होगा। तीसरे चरण में यह एयरपोर्ट 50 मिलियन पैसेंजर की क्षमता वाला होगा। जिसके लिए 8.415 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चौथा चरण 2040 से 2050 तक पूरा होगा। इसके बाद यह 70 मिलियन पैसेंजर की क्षमता वाला एयरपोर्ट बन जाएगा। इसके लिए 10.575 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।