भारत की राह पर जापान, कहा- भारत नहीं तो जापान भी नहीं होगा आरसीईपी में शामिल


नई दिल्ली


भारत के बाद जापान ने भी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते पर चीन को झटका दिया है। प्रधानमंत्री शिंजो आबे की दिल्ली यात्रा सहित कई कूटनीतिक समझौते से पहले जापान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने शुक्रवार को कहा कि अगर भारत आरसीईपी समझौते में शामिल नहीं होता है तो जापान भी इससे परहेज करेगा।


भारत पहले कर चुका है मना
भारत ने इस महीने यह कहते हुए क्षेत्रीय व्यापार समझौते का हिस्सा होने से मना कर दिया था कि इससे उसके देश के बेहद गरीब लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। चीन ने कहा है कि बाकी 15 देशों ने समझौते में आगे बढ़ने का फैसला किया है और जब भारत इसके लिए तैयार हो जाएगा तो उसका आरसीईपी में स्वागत किया जाएगा।


फिलहाल हस्ताक्षर नहीं करेगा जापान
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान के डेप्युटी इकॉनमी, ट्रेड एवं इंडस्ट्री मिनिस्टर हिदेकी माकिहारा ने एक इंटरव्यू में कहा, 'फिलहाल हम इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। हम भारत के साथ आरसीईपी समझौते में शामिल होने के बारे में सोच रहे हैं।' प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने चीन के क्षेत्रीय प्रभुत्व को संतुलित करने के लिए भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का आह्वान किया है।


भारत, जापान की टू प्लस टू बैठक
जापान तथा भारत के विदेश तथा रक्षा मंत्रियों ने इस सप्ताहांत तथाकथित 'टू प्लस टू' फॉर्मेंट में पहली बैठक की। दोनों देश ऑस्ट्रेलिया तथा अमेरिका के साथ सुरक्षा वार्ता में शामिल हैं, जिसे क्वाड कहा गया है और इसकी बीजिंग ने शिकाय करते हुए कहा है कि यह कदम नए शीत युद्ध को दावत दे सकता है।

ये देश हैं वार्ता में शामिल
आरसीईपी वार्ता में हिस्सा लेने वाले अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, न्यू जीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड तथा वियतनाम हैं।


क्या है क्या है आरसीईपी समझौता?
आरसीईपी (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी) एक व्यापार समझौता है। यह सदस्य देशों को एक-दूसरे के साथ व्यापार करने की सहूलियत प्रदान करता है। समझौते के अनुसार सदस्य देशों को आयात और निर्यात पर लगने वाला टैक्स (कर) या तो बिल्कुल नहीं भरना पड़ता है या बहुत ही कम भरना पड़ता है।