बीएसएनएल और एमटीएनएल की स्थिति सुधारने के लिए भारत सरकार ने दिए 69,000 करोड़ रुपए


बीएसएनएल और एमटीएनएल कंपनी पर आखिरकार भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला ले लिया है। भारत सरकार ने अपने फैसले में कहा है कि बीएसएनएल और एमटीएनएल कंपनी को एक किया जाएगा।


एमटीएनएल यानि महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड का विलय बीएसएनएल यानि भारत संचार निगम लिमिटेड में किया जाएगा।


एमटीएनएल यानि महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड का विलय बीएसएनएल यानि भारत संचार निगम लिमिटेड में किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार ने 69,000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है।


BSNL और MNL ना ही बंद होंगे ना ही विनिवेश होगा


कंद्रीय मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल कंपनी को ना ही बंद किया जा रहा है और ना ही विनिवेश किया जा रहा है। हमने इन दोनों कंपनियों की स्थिति को सुधारने के लिए कुछ उपायों पर काम करना शुरू कर दिया है, हमें भरोसा है कि अगले दो सालों में इन उपायों से bsnl के परिचालन में काफी सुधार आ जाएगा। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल कंपनी के मामले में सरकार का रूक एकदम साफ है कि ये भारत की सामरिक संपत्तियां हैं।


वीआरएस पैकेज के बारे में जानकारी देते हुए दूरसंचार मंत्री ने बताया कि "इसके तहत 60 वर्ष की आयु तक कंपनी की सेवा करके अर्जित होने वाली आय का 125 प्रतिशत कर्मचारियों को दिया जाएगा।" उन्होंने कहा कि "इस फैसले के साथ हमने इन सार्वजनिक कंपनियों के लाखों कर्मचारियों के हित का ध्यान रखा है।" हालांकि मंत्री ने कहा कि "वीआरएस पूरी तरह से स्वैच्छिक है, इसके लिए कोई भी किसी कर्मचारी को बाध्य नहीं कर सकता है।


आपको बता दें कि बीएसएनएल कंपनी ने करीब 1.68 लाख कर्मचारी है, जबकि एमटीएनएल कंपनी ने करीब 22,000 कर्मचारी है। अब इन कर्मचारियों में कितने वीआरएस को चुनेंगे, यो तो आने वाले वक्त में ही पता लग पाएगा। हालांकि पुनरुद्धार पैकेज की बात करें तो इसमें 15,000 करोड़ रुपए बकाया कर्ज को खत्म करना, 20,140 करोड़ 4जी स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए, 29,928 करोड़ रुपए कर्मचारियों की सेवानिवृति और वीआरएस के लिए और 3,674 करोड़ रुपए जीएसटी के तौर पर दिया जाएगा।