बीएस-6 लागू होने के बाद पेट्रोल SUV बनेगी पसंद , वैसे-वैसे डीजल इंजन की मांग घट रही है

 



नई दिल्ली


भारत में स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीइकल (SUV) गाड़ी पसंद करने वाले लोग पेट्रोल इंजन को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इससे साफ है कि जिस सेगमेंट में कभी डीजल इंजन का राज था, वह अब खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। सितंबर 2019 में स्थानीय बाजार में बिके 35% यूटिलिटी वीइकल पेट्रोल इंजन वाले थे और यह आंकड़ा पिछले साल सितंबर में 17% था।


ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि बीएस-6 मानक वाले वाहनों के आने से पेट्रोल तथा डीजल वाहनों के बीच कीमतों में असमानता काफी बढ़ेगी, जिसके कारण आने वाले महीनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की पसंद पेट्रोल एसयूवी बनेगी। मारुति सुजुकी में एग्जिक्युटिव डायरेक्टर (मार्केंटिंग ऐंड सेल्स) शशांक श्रीवास्तव का कहना है, 'बीएस-6 मानक के पूरी तरह लागू होने के बाद ग्राहक स्मॉल तथा मिडसाइड एसयूवी में केवल पेट्रोल इंजन को ही तवज्जो देंगे और केवल लार्ज यूटिलिटी वीइकल्स में ही डीजल इंजन का विकल्प प्रासंगिक रह जाएगा।'

कंपनी मारुति अर्टिगा को पेट्रोल तथा डीजल दोनों इंजनों में बेचती है और 56% बिक्री पेट्रोल वेरियंट से आती है। अप्रैल 2020 से कंपनी एसयूवी विटारा ब्रेजा और एस-क्रॉस के डीजल वेरियंट को बनाना बंद कर देगी और इसके केवल पेट्रोल इंजन वाले मॉडल को ही बेचेगी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों का अंतर घटा
श्रीवास्तव ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा, 'कई शहरों में पेट्रोल तथा डीजल ईंधन के बीच कीमत का अंतर घटकर पांच रुपये तक पहुंच गया है, जो मई 2012 में 31 रुपये था। हालत यह है कि कुछ राज्यों जैसे गुजरात, ओडिशा, गोवा में डीजल की कीमत पेट्रोल से अधिक है, जिसके कारण डीजल इंजन वाले वाहन लेने का कोई खास मतलब नहीं रह गया है। इसके अलावा, उपभोक्ता पर्यावरण को लेकर पहले से अधिक संवेदनशील हो गए हैं और अधिकतर लोगों को लगता है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए डीजल इंजन पर कभी भी रोक लग सकती है, जिसके कारण यूटिलिटी वीइकल सेगमेंट में भी पेट्रोल इंजन वाले मॉडलों की बिक्री बढ़ी है।'

15-20% महंगे होंगे डीजल इंजन वाले वाहन
बीएस-6 मानक के लागू होने के बाद डीजल वाहनों की कीमत पेट्रोल वाहनों की तुलना में 15-20% अधिक हो जाएगी, जिसके कारण डीजल वाहनों की मांग में कमी आ सकती है। एमजी मोटर इंडिया के प्रेजिडेंट राजीव चाबा ने कहा, 'बीएस-6 मानक लागू होने के बाद 1.5 लीटर से कम क्षमता वाले तमाम वाहनों के डीजल वेरियंट की मांग में नाटकीय रूप से गिरावट आएगी'