अयोध्या पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक खत्म ,पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर असमंजस


लखनऊ-


अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के हक में जाने के बाद रविवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मसले पर बैठक की. यह बैठक लखनऊ के मुमताज पीजी कॉलेज में हुई. बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष राबे हसन नदवी समेत असदुद्दीन ओवैसी और जफरयाब जिलानी भी मौजूद रहे. बैठक के दो प्रमुख एजेंडे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका लगाई जाए या नहीं और मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन स्वीकार की जाए या नहीं थे. बैठक खत्म हो गई है, जिसके बाद दोपहर 3.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में औपचारिक फैसले के बारे में बताया जाएगा.


यह बैठक हालांकि पहले लखनऊ के नदवा कॉलेज में प्रस्तावित थी. लेकिन अचानक बैठक की जगह बदली गई और मुमताज पीजी कॉलेज में बैठक रखी गई. इस बैठक में मौलाना महमूद मदनी, अरशद मदनी, मौलाना जलाउद्दीन उमरी, मुस्लिम लीग के सांसद बशीर, खालिद रशीद फिरंगी महली, असदुद्दीन ओवैसी, जफरयाब जिलानी, मौलाना रहमानी, वली रहमानी, खालिद सैफुला रहमानी और राबे हसन नदवी मौजूद रहे.


मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन पर चर्चा


अयोध्या मसले पर आए कोर्ट के फैसले में मस्जिद कि ले 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है. रविवार की मीटिंग इस मसले पर चर्चा हुई कि यह जमीन लेनी है या नहीं.


पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर असमंजस


रिव्यू पीटिशन के मसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी सदस्य एकमत नहीं हैं. मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा है कि एक बार फिर हिंदुस्तान को इस इम्तिहान में डालना वाजिब नहीं है. वहीं शनिवार की बैठक में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने हिस्सा नहीं लिया. दोनों ने ये भी साफ कर दिया कि वो अब इस मसले पर कोई रिव्यू पीटिशन दाखिल नहीं करेंगे. हालांकि इस मामले में एम आई सिद्दीकी समेत बाकी तीन पक्षकारों ने याचिका दायर करने को लेकर सहमति दे दी है.



ओवैसी ने 5 एकड़ जमीन लेने से किया इनकार


पुनर्विचार अर्जी के साथ रविवार की बैठक में इस बात का भी फैसला होगा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मस्जिद के लिए दी गई 5 एकड़ की वैकल्पिक जमीन को लिया जाए या नहीं. हालांकि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जमीन लेने से पहले ही इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन की खैरात नहीं चाहिए. हमें इस पांच एकड़ जमीन के प्रस्ताव को खारिज कर देना चाहिए.


बता दें कि कोर्ट के फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा था कि वह फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन इससे संतुष्ट नहीं हैं. बोर्ड फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है. इसी के मंथन के लिए 17 नवंबर को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक होगी.